गुलाब चक्कर - एक गौरवशाली धरोहर
मालवा के हृदय स्थल में स्थित रतलाम का इतिहास और पुरातात्विक वैभव अत्यंत गौरवशाली रहा है। इसी ऐतिहासिक नगर के प्रमुख स्थलों में एक है — गुलाब चक्कर, जो आज भी अपनी विशिष्टता और भव्यता के लिए पहचाना जाता है।
इस गोलाकार स्मारक का निर्माण सन् 1879 में रतलाम के तत्कालीन शासक राजा रणजीत सिंह द्वारा अपनी सुपुत्री गुलाब कुंवर के नाम पर करवाया गया था। इसके निर्माण कार्य का निर्देशन तत्कालीन मुंशी शाहमत अली द्वारा किया गया था। गुलाब चक्कर की विशेषता इसकी वास्तुकला में है — यह संरचना चारों दिशाओं से देखने पर एक जैसी दिखाई देती है। रतलाम रियासत काल की यह एकमात्र ऐसी इमारत है जिसकी आकृति हर दिशा से एक समान प्रतीत होती है। स्मारक के एक ओर ऐतिहासिक रामबाग कोठी और दूसरी ओर हरबर्ट विला स्थित हैं, जो इसकी भव्यता को और अधिक बढ़ाते हैं।
पूर्व काल में गुलाब चक्कर रतलाम की सुंदरता और सांस्कृतिक जीवन का प्रतीक था। शाम के समय जब यहां रोशनी होती थी, पास ही महाराजा टेनिस खेलते थे और बैंड की मधुर धुनें वातावरण को सुरम्य बना देती थीं। उस समय फव्वारों से गुलाबी बौछारें निकलती थीं और पूरा परिवेश एक विशेष गुलाबी रंग में रंग जाता था।
इतिहास में एक और रोचक घटना इस स्थल से जुड़ी हुई है। महाराजा सज्जन सिंह (1880–1947) के शासनकाल में सन् 1900 में रतलाम में पंजाब के पहलवान गुलाम मोहम्मद का प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस प्रदर्शन में पहलवान को सात क्विंटल वज़न का गोलाकार पत्थर अपने सीने पर रखकर रणजीत विलास पैलेस से मित्र निवास भवन तक ले जाना था। हालांकि वह पत्थर को लेकर रामबाग तक ही पहुंच पाए और वह कालिका माता मंदिर के पास गिर गया। यह पत्थर वर्षों वहीं पड़ा रहा, जिसे अब गुलाब चक्कर में स्थापित कर दिया गया है — और यह रतलाम राज्य की खेल संस्कृति का एक जीवंत प्रतीक बन गया है।
समय के साथ देखरेख के अभाव में गुलाब चक्कर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच गया था। किंतु आज, रतलाम पुरातत्व, पर्यटन एवं संस्कृति परिषद और स्थानीय जनसहयोग के माध्यम से इसे फिर से उसकी मूल गरिमा और सौंदर्य के साथ पुनर्स्थापित किया गया है। आज यह स्थल रतलाम के नागरिकों, कला प्रेमियों और इतिहास रुचि रखने वालों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन चुका है।





